16 साल की उम्र से कर रहा पोस्टमार्टम, 25 साल की सेवा के बाद मिला सम्मान… धमतरी के मोहन को सलाम.....

16 साल की उम्र से कर रहा पोस्टमार्टम, 25 साल की सेवा के बाद मिला सम्मान… धमतरी के मोहन को सलाम.....

धमतरी जिले में  इंसानियत और सेवा भावना की एक अनूठी मिसाल धमतरी में देखने को मिली.., जहां 715 लावारिस मृत आत्माओं के मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान किया गया..इसी  के तहत जिला अस्पताल की मर्चुरी में पिछले 25 वर्षों से पोस्टमार्टम का कार्य कर रहे, मोहन का सम्मान कर उनके समर्पण और सेवाभाव को सलाम किया गया.....
पितृ पक्ष के अंतिम दिन जब लोग अपने पितरों को याद कर रहे थे... तब धमतरी के रुद्रेश्वर घाट पर सर्व हिंदू समाज ने एक ऐसी पहल की, जिसने मानवता और सामाजिक संवेदनशीलता का अनूठा संदेश दिया... यहां 715 ऐसी मृत आत्माओं के लिए पूरे विधि-विधान से पिंडदान किया गया..., जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं था... इस आयोजन के माध्यम से उन लोगों को भी सम्मान और धार्मिक संस्कार देने का प्रयास किया गया.. जिनकी मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था....इसी कार्यक्रम के मंच से मोहन को सम्मानित किया गया... जिन्हें लोग पोस्टमार्टम किंग के नाम से जानते हैं... बताया जाता है कि मोहन महज 16 साल की उम्र से पोस्टमार्टम के कार्य से जुड़े हैं और पिछले 25 वर्षों से धमतरी जिला अस्पताल की मर्चुरी में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं....
यह काम जितना कठिन है, उतना ही संवेदनशील भी...जहां कई लोग इस जिम्मेदारी से दूर रहना पसंद करते हैं...वहीं मोहन वर्षों से अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर रहे हैं.... शासन-प्रशासन के विभिन्न कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका और सेवाभाव की सराहना की जाती रही है...सम्मान समारोह में महापौर सहित हिंदू समाज के वरिष्ठजन और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे... इस दौरान मोहन को शॉल, श्रीफल, नगद राशि और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया...सम्मान मिलने पर मोहन ने भावुकता के साथ कहा कि यह उनके 25 वर्षों की मेहनत का फल है...मोहन की यह उपलब्धि केवल एक सम्मान की कहानी नहीं... बल्कि उस मेहनत और समर्पण की पहचान है, जो अक्सर पर्दे के पीछे रह जाता है...उनका कार्य समाज को यह संदेश देता है कि हर जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है और हर सेवा सम्मान की हकदार है...अब मांग उठने लगी है कि मोहन की वर्षों की सेवाओं को देखते हुए उन्हें प्रदेश स्तर पर भी सम्मानित किया जाए,.... ताकि उनके योगदान को व्यापक पहचान मिल सके....

सलाम है मोहन के जज्बे को, उनकी मेहनत को और उस इंसानियत को, जो बिना किसी दिखावे के अपना फर्ज निभाती है.....

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